योगेश शुक्ला--(दो शब्द)
Sunday, 8 May 2016
रसखान---(जेहि बिनु जाने कछुहि नहिं )
जेहि बिनु जाने कछुहि नहिं जान्यों जात बिसेस.
सोई प्रेम जेहि आन कै रही जात न कछु सेस.
प्रेम फाँस सो फँसि मरै सोई जियै सदाहिं .
प्रेम मरम जाने बिना मरि कोउ जीवत नाहिं.
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